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Book Details


Wo Dhuaan Tha



Authored By: Sanskrity Sinha


Publisher:  Authorspress


ISBN-13: 9789389110029


Year of Publication: 2019


Pages: 100

                                       Binding: Paperback(PB)


Category:  Poetry, Fiction and Short Stories


Price in Rs. 206.50

                             Price in (USA) $. 16.52

                            
Inclusive of All Taxes (After 30% Discount on the Printed Price)

Book Description


Book Contents


 
 

About the Book


 

आपने कभी डायरी लिखी या लिखने की कोशिश की है? डायरी में अक्सर हम सच लिखते-लिखते कुछ आधा-अधूरा, पूरा सच छिपा ही लेते हैं, इस डर से कि कोई पढ़ न ले। लेकिन कविता लिखते वक्त बहुत हैरत होती है कि हम केवल सच ही रचते हैं। कविता लिखने से यह एहसास होता है कि कविता से सच क्या होगा?अपने ऐसे ही कई एहसासों और वास्तविकताओं को संस्कृति सिन्हाने "वो धुआँ था"संग्रह में पिरोया है। जैसे ठंडे होते राख से उठता धुआँ ख़ुद को हवाओं पर न्योछावर कर देता है, जैसे वह पीछे अपनी एक निशान छोड़ फिर अदृश्य हो जाता है, वैसे ही ब्रह्मांड में वापस विलीन होने के लिए, हम हमारी यात्रा पर अग्र हैं। आशा है, "वो धुआँ था" में आपको भी अपने सफ़र की कुछ झलकदेखने को मिलें।आपने कभी डायरी लिखी या लिखने की कोशिश की है? डायरी में अक्सर हम सच लिखते-लिखते कुछ आधा-अधूरा, पूरा सच छिपा ही लेते हैं, इस डर से कि कोई पढ़ न ले। लेकिन कविता लिखते वक्त बहुत हैरत होती है कि हम केवल सच ही रचते हैं। कविता लिखने से यह एहसास होता है कि कविता से सच क्या होगा?अपने ऐसे ही कई एहसासों और वास्तविकताओं को संस्कृति सिन्हाने "वो धुआँ था"संग्रह में पिरोया है। जैसे ठंडे होते राख से उठता धुआँ ख़ुद को हवाओं पर न्योछावर कर देता है, जैसे वह पीछे अपनी एक निशान छोड़ फिर अदृश्य हो जाता है, वैसे ही ब्रह्मांड में वापस विलीन होने के लिए, हम हमारी यात्रा पर अग्र हैं। आशा है, "वो धुआँ था" में आपको भी अपने सफ़र की कुछ झलकदेखने को मिलें।


About the Author


 

स्कूल में साथ पढ़नेवालों को खड़ूस लगती थी, कॉलेज के दोस्तों को खूब मज़ेदार, परिवार वालों को थोड़ी अड़ियल, आॉफिस वालों को गंभीर। संस्कृति सिन्हा पूछतीं हैं कि क्या खुद का परिचय कभी भी पूरा सच बता सकता है?  एक दशक से न्यू मीडिया में पत्रकारिता करते हुए उन्हें अपनी लेखनी को असंख्य पढ़ने वालों तक पहुँचाने के लिए सराहा गया है। अपने अब तक के करियर में संस्कृति ने देश और विदेश में काम किया है। खा़सकर साल 2007 में जर्मनी के रेडियो डॉयचे वेले की हिंदी सेवा मेंजहाँ उन्होंने एक पाकिस्तानी सहकर्मी के साथ मिलकर दोनों मुल्कों के बीच शांति को बढ़ावा देने के लिए, युवाओं के लिए प्रोग्राम प्रसारित किए। संस्कृति ने देश के लिए एक यूथ एजेंडा बनाने में बतौर शोधकर्ता का काम किया है। साल 2008 में उन्होंने ब्रुसेल्स में आयोजित यूरोपीय संघऔर भारत की साझेदारी को समझने के लिए एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया।संस्कृति ने पांच देशों और बारह विदेशी शहरों का भ्रमण अकेले किया है, जिसके अनुभव के बारे में वे कहती हैं: “परदेस की सड़कों पर अपने देश की पोशाक पहन कर चलना सबसे ज़यादा रोमांचक लगता है।” बिहार में जन्मी, पली और शिक्षा प्राप्त कर, संस्कृति सिन्हाइन दिनों नोएडा में अपने पति के साथ रहती हैं और अपने जुड़वा बेटों के परवरिश के साथ-साथ एक अमेरीकी पत्रिका के लिए संपादन का काम करती हैं।

 

संपर्क – 
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