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Book Details


Pachasottar Naatko Mein Naari



Authored By: Shashikala A. V.


Publisher:  Authorspress


ISBN-13: 9789388859769


Year of Publication: 2019


Pages: 150

                                       Binding: Hardback(HB)


Category:  Poetry, Fiction and Short Stories


Price in Rs. 276.50

                             Price in (USA) $. 22.12

                            
Inclusive of All Taxes (After 30% Discount on the Printed Price)

Book Description


Book Contents


 
 

About the Book


 

About the Author


 

पचासोत्तर हिंदी साहित्य की सभी विषयों में कथ्य और शिल्प की दृष्टि से लेखकीय जीवन-दृष्टि में भी एक व्यापक चेतना आन्दोलन की तरह जागृत होती है।इसी समय से नाटयक्षेत्र में आधुनिकीकरण और पाश्चात्यीकरण शुरु होती है। राजनैतिक और आर्थिक तौर पर स्वातंत्र्योत्तर समाज में परिवर्तन हो रहे थे। जनता के जीवन में परिवर्तन होने के साथ ही सामाजिक मूल्यों में भी परिवर्तन आने लगा। पाश्चात्य जीवन मूल्यों और शिक्षा के फैलाव ने सामाजिक मूल्यों को प्रचुर मात्रा में प्रभावित किया। सामाजिक व्यवस्थितियों में होनेवाले परिवर्तन से व्यक्तियों में भी बदलाव आने लगे। आज व्यक्तित्व विकास के लिए बाधक सामाजिक मूल्य अस्वीकृत होने लगे हैं।

नारी की स्थिति में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद क्रांतिकारी परिवर्तन हुए है। वह आधुनिकता की तर्ज पर चलने का गौरव अनुभव करने लगी है। इस समाज में पुरुष का उत्कृष्ट स्थान है और स्त्री की अस्मिता पुरुष सापेक्ष ही मूल्यांकित किया जाता है। नारी अपनी शक्ति को पहचानने एवं अस्मिता के लिए संघर्ष करने लगी है। अब उसे अपनी पराधीनता और स्वतंत्रता का बोध होने लगा है। अब तक की दबी कुचली खामोश दुनिया अपने स्वत्वाधिकारों और अस्मिताओं के बारे में पूरी प्रखरता के साथ सोचने लगी है। पहले समाज में जैसी नारी की स्थिति थी, उसी प्रकार नाटकों में भी नारी की स्थिति जटिल थी।

हमारे समाज में स्त्रियों की बदलती हुई अवस्था आधुनिक नाटकों के विषय बन रहा है। मोहन राकेश, धर्मवीर भारती, सुरेंद्र वर्मा,लक्ष्मी नारायण लाल, भीष्म साहनी, शंकर शेष, मन्नू भण्डारी, मीराकांत आदि नाटककारों के नाटकों को यहाँ चित्रित किया गया है।पचास के बाद के नाटकों में मल्लिका, सुन्दरी, सावित्री, गाँधारी, शीलवती, सुरेखा, कनक, पूर्वी (दर्पन), गंगा, कविता, छाया, सुजाता, ललिता, माधवी, चैती, खना, शोभा आदि कई नारी पात्र है जो आधुनिक स्त्रियों की याद दिलाती है और वर्तमान कालीन नारियों के अस्मिता बोध पर गहरा प्रभाव डालने लायक है।