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Book Details


Maddi Ka Vaachik Sahitya



Authored By: Sushila Meena


Publisher:  Authorspress


ISBN-13: 9789386722676


Year of Publication: 2017


Pages: 104

                                       Binding: Paperback(PB)


Category:  Poetry, Fiction and Short Stories


Price in Rs. 210.00

                             Price in (USA) $. 16.8

                            
Inclusive of All Taxes (After 30% Discount on the Printed Price)

Book Description


Book Contents


 
 

About the Book


 

भारत की भाषायी-सम्पदा, लोक के बहुलतावादी-यथार्थ को आत्मसात् किये हुये है। इस लोक की मिल्कीयत का संकलन और परिरक्षण आवश्यक है। प्रत्येक भाषा में जीवन को देखने का विश्व-बोध अंतर्निहित होता है।‘माड़’ अंचल में बोली जाने वाली भाषा को ‘माड़-भाषा’ या ‘माड़ी’ के नाम से जाना जाता है।‘माड़’ का अर्थ है- ‘मड़’/ ‘गारा’या ‘काली मिट्टी’ का क्षेत्र। यह शब्द स्थान विशेष से संबध्द होकर राग-विशेष का वाचक बन गया। यह पूर्वी राजस्थान के सवाई माधोपुर, करौली जिलों की बामनवास, गंगापुर सिटी, नादौती और सपोटरा (कुछ हिस्सा) आदि तहसीलों की भाषा है।‘माड़ी’ का वाचिक साहित्य पर्याप्त समृध्द है। इसके लोक-कलात्मक रूप हैं- ‘रामजी के गीत’, ‘कन्हैया’, ‘रसिया’, ‘हेला-ख्याल’, ‘पद’, ‘सुड्डा’, ‘ढाँचा’, ‘जोगियों के गीत’, ‘ग्याड़’, ‘माँडणे’, और ‘कुदकन्ना’। आज यह भाषा संकटग्रस्त है।‘माड़ी’ लोक-जीवन के संवाद की भाषा है।‘माड़ी’ लोक-भाषा साम्प्रदायिक, धार्मिक नस्लीय भेदभावों से ऊपर ‘सामासिक-संस्कृति’ का निर्माण करती है।

-डॉ. भीमसिंह


About the Author


 

सुशीला मीणा

जन्म – 11 फरवरी,1986 को राजस्थान के करौली जिला के सोप गाँव में।

शैक्षणिक-योग्यताएँ -बी.ए., बी.एड.(CTET), एम.ए, एम.फिल्.(CDAST),नेट/जेआरएफ, स्लैट, पी-एच.डी.(हिन्दी,शोधरत्) हैदराबाद विश्वविद्यालय।

पुरस्कार - एम.ए.(2012) में सर्वप्रथम उत्तीर्ण होने के उपलक्ष्य में मुकुंददास भगवानदास हिन्दी पदक से पुरस्कृत।

लेखन - विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेख और समीक्षा।

रुचि - लोक-साहित्य और कविता में।

पता - हिन्दी विभाग, मानविकी संकाय, हैदराबाद विश्वविद्यालय, हैदराबाद-500046।

ईमेल - susheelameena2010@gmail.com