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Sanskrity Sinha


 

 

स्कूल में साथ पढ़नेवालों को खड़ूस लगती थी, कॉलेज के दोस्तों को खूब मज़ेदार, परिवार वालों को थोड़ी अड़ियल, आॉफिस वालों को गंभीर। संस्कृति सिन्हा पूछतीं हैं कि क्या खुद का परिचय कभी भी पूरा सच बता सकता है?एक दशक से न्यू मीडिया में पत्रकारिता करते हुए उन्हें अपनी लेखनी को असंख्य पढ़ने वालों तक पहुँचाने के लिए सराहा गया है। अपने अब तक के करियर में संस्कृति ने देश और विदेश में काम किया है। खा़सकर साल 2007 में जर्मनी के रेडियो डॉयचे वेले की हिंदी सेवा में जहाँ उन्होंने एक पाकिस्तानी सहकर्मी के साथ मिलकर दोनों मुल्कों के बीच शांति को बढ़ावा देने के लिए, युवाओं के लिए प्रोग्राम प्रसारित किए। संस्कृति ने देश के लिए एक यूथ एजेंडा बनाने में बतौर शोधकर्ता का काम किया है। साल 2008 में उन्होंने ब्रुसेल्स में आयोजित यूरोपीय संघ और भारत की साझेदारी को समझने के लिए एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। संस्कृति ने पांच देशों और बारह विदेशी शहरों का भ्रमण अकेले किया है, जिसके अनुभव के बारे में वे कहती हैं: “परदेस की सड़कों पर अपने देश की पोशाक पहन कर चलना सबसे ज़यादा रोमांचक लगता है।” बिहार में जन्मी, पली और शिक्षा प्राप्त कर, संस्कृति सिन्हा इन दिनों नोएडा में अपने पति के साथ रहती हैं और अपने जुड़वा बेटों के परवरिश के साथ-साथ इंडिया वेस्ट नामक अमेरीकी पत्रिका के लिए संपादन का काम करती हैं।
Email: sanskrity2002@gmail.com

 


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